शिक्षक
दूसरों को उजाला देने के लिए, मोम बनकर पिघलता है शिक्षक। खुद को जला कर दूसरों को ज्ञान देता है
Read Moreसदा रहा पथ प्रदर्शक, कैसे हो सकता है दर्शक? सिर्फ नहीं रहा विमर्श, सदा रहा उत्कर्ष। जब जग में छाया
Read Moreनारी के लिए “नारी समानता दिवस” सिर्फ एक दिन के रूप में मना कर खुश होना कितना अधूरा लगता है।
Read Moreपरछाई भी समय के साथ बदल जाती है। आदमी का रंग भला कैसा हो? पर परछाई का स्वरूप सदा एक
Read Moreफूलों सी महकती है वो। तारों सी चमकती है वो। चिड़िया सी चहकती है वो। रूठे को मना लेती है
Read Moreउपन्यास सम्राट प्रेमचंद भारतीय साहित्य संस्कृति की अस्मिता के प्रतीक थे । वे आधुनिक कहानी के पितामह थे। एक बहुमुखी
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