नारी तुम स्रजन हो
आए दिन नारी संवेदना के स्वर गूंजते रहते हैं …..द्रवित करते रहते हैं हॄदय को ….छलक ही आते हैं आँखों
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Read Moreविचारधाराएँ बदल रही है लोगों की. माना, दे रहे हैं लोग बेटियों को भी बेटों के बराबरी का दर्जा. उच्च
Read Moreकन्या कोई वस्तु नहीं जो दान मे दी जाए घर घर का मान है अपमान न की जाए शील है
Read Moreनारी तुम माधुर्य हो इस सृष्टि की सुन्दर रचना का स्वर से सज्जित रागिनी हो विश्व वीणा के सप्तक का
Read Moreसच तुम्हारे एक चुटकी सिंदूर ने कैद कर लिया मुझे हॄदय में नथ दिया नथनियों में पहना कर चुडियों की
Read Moreजीवन के गीतो के आरोह और अवरोहों में मेरा समर्पण पकड़ चल रही सांसों की सरगम निरन्तर सुन्दर तुम्हारे मन्द्र
Read Moreनित्य नई मैं विषय बनूंगी लिखो काव्य मैं वेदना हूँ सात सुरो में राग जिन्दगी छेडो तान मैं वन्दना हूँ सरल सुन्दर
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