कहाँ गईं कविताएँ ?
छलकाती रस से भर गगरीकरती दूर व्यथाएँकहाँ गईं कविताएँ ? मधुरस भरकर,कटि पर रखकरमटक – मटक छलकातीसुर, लय ताल मेंयुगलबंदी
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Read Moreसुघड़, सलोनी, प्यारी – प्यारीजिसपर जाऊँ मैं बलिहारीमति को उलझाये रखती हैकहती है सुन दिल की बातेंयाद करो वह प्रीत
Read Moreबूंदे बारिश की छू- छू मुझे कह रहीं बूंदे बारिश की छू- छू मुझे कह रहींचल किरण आज संग मेरे
Read More9 मई 2024 गुरुवार को भोपाल श्यामल हिल्स पर स्थित मानस भवन में बाल कल्याण एवम् बाल साहित्य शोध केंद्र
Read Moreसूप पर हँसने लगी है चलनी जिसमें खुद है छेद बहत्तर दिखा रहे पर खुद को इतर उँचे हो गये
Read Moreसितारे टाँक श्रद्धा की चुनर मैंने बनाई है सभी भावों के सुमनो से ग़ज़ल माला सजाई है पखारे पाँव
Read Moreजीवन का सत्य अरे – अरे यह मैं कहाँ आ गई? अपनी हमउम्र श्याम वर्णा तराशे हुए नैन नक्श वाली
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