कविता
कविता मन के भावों का प्रदर्शन करती है,पर्वत के झरने से, झर झर झरा करती है।उछल कूद करती, मचल मचल
Read Moreखुद पर हँसना सीख लिया है,हाँ, हमने जीना सीख लिया है।रोने से क्या हासिल होता,हमने गम में सीख लिया है।
Read Moreजानते हैं बिल्ली को कुत्ते से लड़ाना,शांति के पुजारी को आतंकी बताना।धर्म और संस्कृति की बातें भुलाकर,सत्ता की खातिर, रिश्तों
Read Moreवैदिक परम्परा में वर्णाश्रम धर्म एवं चार वर्णों को आधार माना जाता है। परन्तु वर्तमान में इसका जो रूप हमें
Read Moreधर्म शास्त्रों में मानव की, चार जातियाँ बतलाई,कर्म आधार निर्धारण की, व्यवस्था भी समझाई।अनुलोम विलोम भी सम्भव, था योग्यता पर
Read Moreनारी सशक्तिकरण की पहचान हो कैसे, यह हमको बतला डालो,क्या मानक, कौन पैमाना- कौन तराजू, इसको भी समझा डालो।क्या अर्धनग्न
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