आखिर मैं हूँ ऐसी क्यों?
मैं कैसे भूलूँ वो सपना? जो हो न सका कभी अपना आखिर मैं हूँ ऐसी क्यों? मैं हुई नहीं उस
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Read Moreअलकेमिस्ट यानी कीमियागर, कीमियागर उसे कहते हैं जो पत्थर को सोने में तब्दील करने की कला जानता हो।बार बार मन
Read Moreमौका था वन महोत्सव का,आयोजन विद्यालय परिसर के प्रांगण में होना था।कार्यक्रम का उद्घाटन करने माननीय मंत्री महोदय पधारने वाले
Read Moreजिस दिन मेरा जन्म हुआ तुम, फूट फूट क्यों रोई माँ क्या सपनों की माला टूटी, जो तुमने पिरोई माँ
Read Moreसाल बदल जाये तो क्या , समय न अभी भी बदला है पूस माघ में छुटकू के तन पर, अब
Read Moreशायद किसी बाइक के विज्ञापन पोस्टर पर लिखा था- every day is a Race Day’. एक बाइक कंपनी के लिए
Read Moreमेरे नन्हें से हाथों ने बड़ी जोर से थामा था लगता था मेरी मुट्ठी में तब सारा जमाना था बाजार
Read Moreआज मैं हूँ उलझन में अपनों से अनबन में जो कभी सोचा नहीं वो घट रहा है जीवन में झूठ
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