ईश्वर का प्रतिरूप धरा पर
मरीजो की करें सेवा समर्पित करके जीवन धन। लड़े दिन रात रोगों से मनुज को दे रहे जीवन। यही भगवान
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Read Moreबसन्त (दोहे) मधु ऋतु ने दस्तक करी ,दशों दिशा हुलसाय | अमराई बौरों भरी , गली गली महकाय || हरे
Read Moreनव भोर सुहानी बिखरी सी —————— पीली – पीली फूली सरसों , ली ओढ़ धरा ने चुनरी सी | बागों
Read Moreबोलो सा रा रा रा उड़ते बादल रंग रंगीले , हुई रंगीली दुनियाँ, बच्चों के सपने रंगीले ,रंग में भीगी
Read Moreनारी जीवन की स्वायत्तता, आत्मनिर्भरता एवं आत्मसम्मान ….…………………………….. यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता । यत्रैतास्तु न पूज्यंते सर्वास्त फला:
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