भ्रम
जिसको बस्ती समझता रहा , उम्र भर दरअसल , वही मरघट निकला । जहां से प्रत्येक क्षण लाशें निकलती है
Read Moreनव वर्ष आया नवग्रह नवरात्रि पार करके । फूल खिला नव प्रभात शुभ रात्रि पार करके ।। नव वर्ष आया
Read Moreजिंदगी की दहलीज पर खड़ा होकर एक दिन उम्र ने तलाशी ली तजुर्बे की जेब से जो बरामद हुआ वह
Read Moreकराहा होगा फूट-फूटकर वो बिचारा । जो टूट गयी होगी उम्मीदों की धारा ।। कुछ तो रहा होगा जिंदगी से
Read Moreसदियों से चला ये सिलसिला है कहते हैं इश्क इक जलजला है खूब जला और खूब जलाया भी कौन क्या
Read Moreनहीं है नहीं…, नहीं है नहीं…! मेरा सौभाग्य जयन्ती नहीं…, मेरा सौभाग्य जयन्ती नहीं..!! पुरखोंं का सम्पति नहीं…! मैं स्वयं
Read Moreनैनो को नैनों से बतियाने दो…, ख्वाबों को नींद में सो जाने दो…! नींद है तो सपने हैं…, ख्याल है
Read Moreजेब से फ़कीर और दिल से उदास में हूँ । मानो न मानो कई सालों से वनवास में हूँ ।।
Read Moreक्या से क्या हो गये…, ज़िन्दगी तेरे चाह में …। गर्दिश की फूल हो गये…,
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