मुक्तक/दोहा

इश्क़ जलजला है…

सदियों से चला ये सिलसिला है
कहते हैं  इश्क इक जलजला है
खूब जला और खूब जलाया भी
कौन क्या कब साथ लेकर चला है ।
— मनोज शाह ‘मानस’

मनोज शाह 'मानस'

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