आदमी पर चंद अश’आर
खा जाता है हुजूर आदमी को आदमी का गुरूर आदमी को। बनाता है नेको-बद आदमी को आदमी का शऊर आदमी
Read Moreखा जाता है हुजूर आदमी को आदमी का गुरूर आदमी को। बनाता है नेको-बद आदमी को आदमी का शऊर आदमी
Read Moreकविता समय का अर्पण है साहित्य समय का दर्पण है हर मुद्दे पर बात करें जो और समय के साथ
Read Moreईश्वर ओम हो जाएगा पत्थर मोम हो जाएगा घर में क्लेश कैसा जब संकट होम हो जाएगा पढ़ अध्यात्म-दर्शन खुद
Read Moreमानव नहीं दरिंदे हैं हम, मनबढ़ मस्त परिंदे हैं हम, प्यास हमारी जिस्मानी है, हैवानी पर जिंदे हैं हम। मानव
Read Moreसीधे-सादे थे सरल भारत के स्वर्णिम कल पुण्यतिथि पर करूं नमन थे अटल इरादों वालें अटल सर्वगुण-संपन्न सफल सच्चे राष्ट्र-नायक
Read Moreवैमनस्यता रहे न ही दंगा रहे मोहब्बत में न कोई अड़ंगा रहे परचम लहराता हुआ विश्व में विजयी विश्व तिरंगा
Read Moreरामू! रामू हाॅं बाबू मेहमान आयें हैं मेहमान अच्छऽ बाबू! कहते हुए साथ में कुछ कुर्सियाॅं और बिछौना लिए रामू आता
Read Moreकिसी की मूक है कविता किसी की भूख है कविता किसी की आस है कविता किसी की प्यास है कविता
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