समाचार

काव्या सतत साहित्य यात्रा की काव्यगोष्ठी

धूप–वर्षा की आंखमिचौली ने खूब भ्रम में रखा कि कार्यक्रम हो सकेगा या नहीं किंतु इंद्र की कृपा व मित्रों के साथ के कारण दिनांक 25 मार्च,दिन शनिवार की शाम सात बजे, शारदेय प्रकाशन व काव्या सतत साहित्य यात्रा के संयुक्त तत्वावधान में लखनऊ पुस्तक मेला परिसर,चारबाग लखनऊ में सुरीली काव्यगोष्ठी सम्पन्न हो ही गई। […]

समाचार

काव्या की मासिक काव्यगोष्ठी

दिनांक 22 फरवरी,दिन मंगलवार की शाम शारदेय प्रकाशन व काव्या सतत साहित्य यात्रा के संयुक्त तत्वावधान में गोमतीनगर ,लखनऊ में मासिक काव्यगोष्ठी सम्पन्न हुई। अध्यक्ष-सुधा सिंह,मुख्य अतिथि-रचना सरन(कोलकाता),विशिष्ट अतिथि-हेमलता शर्मा जी थीं।वाणी वंदना अपर्णा सिंह ने भोजपुरी भाषा में की। तत्पश्चात संजना मिश्रा,वंदना गुप्ता, सुमन श्रीवास्तव,कुलदीप ‘कलश’,राजीव वर्मा’वत्सल’, चंद्रशेखर वर्मा,बलवंत सिंह,विनीता मिश्रा,अलका प्रमोद,निवेदिताश्री ने काव्यपाठ […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

यार बनके जो’ भूल जाते हैं। बाख़ुदा याद रोज आते हैं। कोई’ वादा नहीं हुआ फिर भी। राह में फूल हम बिछाते हैं। आख़िरी ख़्वाब आख़िरी चाहत। दफ़्न सीने में’ गुनगुनाते हैं। वो नदी की तरह दिखें सबको। सिसिकियाँ तह में जो दबाते हैं । ज़ीस्त ये इश्क़ में लगायी तो। कब्र तक पाँव लड़खड़ाते […]

समाचार

निवेदिता श्री को ’काव्य श्री सम्मान’

5 फरवरी 2023, दिन रविवार दिल्ली के हिंदी भवन में लखनऊ की निवेदिता श्री को ’काव्य श्री सम्मान’ अंतर्राष्ट्रीय शब्द सृजन संस्थान द्वारा प्राप्त हुआ। विशेष उपलब्धि जनरल वी के चतुर्वेदी व ब्रिगेडियर भुवनेश,प्रमोद कुश तन्हा जी व राजीव पाण्डेय जी से भेंट थी।बिहार से आए विनोद कुमार ’हंसोड़ा’ जी ने दस मिनट में पूरी […]

कहानी

हम होंगे कामयाब

सम्बंध विच्छेद के मुकदमे की पहली तारीख़ थी । बहुत दिनों बाद चार्वी संचित को देख रही थी । संचित उसके जीवन का आदर्श पुरूष हुआ करता था । आज से पाँच वर्ष पूर्व ही तो मिले थे दोनों दफ़्तर की कैंटीन में । चार्वी सुबह देर से उठी थी , खाना बनाने का समय […]

लघुकथा

तोड़ती बेड़ियाँ

धीमा स्वर कब उच्च हो गया दोनो को ही पता नहीं चला।कमरे के बाहर घर के सभी सदस्य जमा हो गए थे। नयी नवेली बहू बेटे से सवाल पर सवाल कर रही थी, “हाँ, कोरोना से बचना चाहिये।शादी किये महीना पूरा हो गया।आप और हम कब तक सोशल डिस्टेंसिंग मनाएंगे?? हम कब तक एक दूसरे […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सियासत में सभी कहते बदी है। जो डूबा तर नहीं पाया कमी है। क़यामत ये नयी दुनियाँ कहूँ क्या इसे कुछ कह न पाना बेकसी है। अदीबों का यहाँ है क़त्ल होता यहाँ गंगा सदा उल्टी बही है। कहें देखो सभी साक़ी को’ रानी महारानी भुलायी सी गयी है। भगत सिंहों तुम्हें खोजे जमाना। तुम्हीं […]

संस्मरण

संस्मरण : वो होस्टल के दिन

बात उन दिनों की है जब हम परास्नातक करने गोरखपुर विश्वविद्यालय में पहुँचे।दाखिला मिलने के बाद रहने की समस्या आयी तो विश्वविद्यालय के महिला छात्रावास रानी लक्ष्मी बाई पहुँच गए।पर मैट्रन जी ने जगह नहीं है, कह कर बाहर का रास्ता दिखा दिया। पढ़ाई तो करनी ही थी लिहाजा अपनी एक स्नातक करते समय की […]

कुण्डली/छंद

कुण्डली

कोरोना की सूचना, छिपती कब है यार। छुपम छुपाई खेलता,राही खाता मार। राही खाता मार,घड़ी अलबेली आई। कानूनन अपराध,कहें सब ही अब साईं। वाम भजे श्री राम,हुआ क्या बोलो टोना। नमन करें कर जोड़,जय जय तेरी करोना। — निवेदिता श्री

मुक्तक/दोहा

चंद दोहे आरक्षण के नाम

” दीमक वाले देश में,बस कुर्सी की होड़। आरक्षण की आड़ में,पनप रहा है कोढ़।।” “आरक्षण धरना लगे, देशद्रोह सम पाप। गदहे दौड़े कब कभी,जीन कसें क्यूँ आप?” “आरक्षण की मार से,योग्य हुए लाचार। सच्चा मिट्टी में पड़ा, झूठे का व्यापार।।” “गगन धरा सब रो रहे,मानव को नहिं चैन। आरक्षण से बाँटता,खुद को ही दिन-रैन।।” […]