Author: *ओमप्रकाश क्षत्रिय "प्रकाश"

शिशुगीत

शिशु गीत- आम

कच्चे आम हरेभरे है पक्के है पीलेपीले. रस भरे रसीले है लगते जैसे गीले  गीले. इस को मुनिया खाएगी रस

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लघुकथा

लघुकथा – आक्रोश

लघुकथा – आक्रोश ————————- गणितविज्ञान के साथ संस्कृत की स्थिति देख कर निरीक्षक महोदय बिफर पड़े, “ बच्चों का स्तर

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लघुकथा

लघुकथा- तीर्थयात्रा

हरिद्वार जाने वाली गाड़ी दिल्ली पहुंची थी कि फोन घनघना उठा, “हेल्लो भैया !” “हाँ हाँ ! क्या कहा ?

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