Author: *डॉ. प्रदीप उपाध्याय

हास्य व्यंग्य

मुफ्त में बांटना विकास की ओर बढ़ता एक कदम

किसी जमाने में रेवड़ियां बांटने का चलन रहा होगा, शायद खूब रेवड़ियां बंटती थीं।बांटने वाला भी दिल फरियाद, लेकिन यह

Read More
हास्य व्यंग्य

अनुशासन के लिए तानाशाही ही सही…

उन्होंने कहा है तो सच ही होगा।यदि अनुशासन में किसी को लायेंगे तो तानाशाह तो कहलायेंगे ही।घर हो,परिवार हो,दफ्तर हो,सदन

Read More