सामाजिक

एकांत स्मृतियां और दुःख

आदमी अपने एकान्त में दिपता है। स्वयं को टकटकी बाँधें देखते रहना उसे चौंकाता है। भीड़ तो वह ही होती है, जो आपके अतिरिक्त हो। आपके होते ही वह भीड़ कहाँ ! भीड़ ही इकलौता छोड़ती है। आदमी भर भीड़ नहीं छोड़ पाता। एकान्त तो निचोड़ता है। रत्तीभर भी नहीं छोड़ता। वह तो किसी गहरे […]

सामाजिक

मूल से अधिक प्रिय होता है ब्याज

इसीलिए वे या वैसे लोग जो अपने बच्चों के बचपन के क्रिया-कलापों को पास से देखने से किसी भी कारणवश वंचित रह गए थे, उनके लिए तो अपने पौत्र-पौत्रियों की गतिविधियों को देख पाना किसी दैवीय वरदान से कम नहीं होता ! यही वह अलौकिक सुख है जिसकी खातिर उनका प्रेम, उनका स्नेह, उनका वात्सल्य, […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

सृष्टि के रोम रोम में शिव

भगवान शिव सनातन धर्म के सर्वशक्तिमान देवों में से एक हैं। शिव ऐसे अद्भुत देव हैं जो सभी को प्रिय हैं। न तो उन्होंने स्वर्णाभूषण और सुनहरे परिधान पहने हैं, न ही उन्हें विलासितापूर्ण जीवन प्रिय है। सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण यह है कि भगवान शिव को संहारक भी कहा गया है। क्या यह विचित्र नहीं है […]

सामाजिक

माता-पिता

माता पिता भी तो इंसान हैं हमारे सपनों को पूरा करने के लिए न जाने अपने कितने अरमानों को अधूरें  सपनों को त्याग दिये  होंगे बिना पूरा किये। उनके सपने चाहें पूरे हुए या नहीं वो उसे भूल नहीं पाते उन अधूरे सपनों की एक पोटली बनाकर रख देते हैं। और हमारा भविष्य संवारने में […]

भाषा-साहित्य

महिला लेखन : स्त्री-अस्मिता का साहित्य

पिछले कुछ दशक में हिंदी साहित्य में स्त्री लेखन का व्यापक प्रस्फुटन एक अनूठी और ऐतिहासिक घटना है। यहां स्त्री लेखन एक सामाजिक सच्चाई और अस्मिता के संघर्ष की चुनौती के रूप में सामने आता है। यह स्त्री के अपने नजरिए से स्त्री लेखन का नया पाठ है। इस साहित्य में स्त्री विमर्श अस्मिता का […]

सामाजिक

मेरी कुछ बातें शायद अभी भी क़ैद में हैं

जी हां कुछ बातें हमेशा कैद में पड़ी रहती है। वे जन्म लेती है हृदय में भावों की गहराई से और वहीं अपना जीवन गुजार देती है। उन्हें मिली कैद का भी कारण होता है, उन्हें शांति बिगाड़ने की शंका में मिलती है कैद। क्योंकि हृदय भयभीत होता है, कि यदि इन्हें आज़ाद कर दिया […]

सामाजिक

पिंजरा

जब एक नन्ही  चिड़िया तिनका-तिनका जोड़कर अपना घोंसला बनाती है बड़े अरमान और  विश्वास से उसे सजाती है और सोचती है  इसमे वोऔर उसके बच्चे सुरक्षित रहेगे खुशी मे वो भूल जाती है घोंसला तो उसका है जिसे उसने कड़ी मेहनत और लगन से बनाया है पर वो पेड़ या वो घर उसका नही जहां […]

सामाजिक

आपका बुरा वक़्त, उसका मापदंड, संयम और सीख 

जिन्दगी में बहुत सारी चीज़ें ऐसी होती हैं, जो आपके अनुसार नहीं चलती। आप दिल से पूरे मन से चाहते हो, कोशिश करते हो की वो चीज़ ठीक वैसे ही हो जैसे आप चाहते हो। लेकिन शायद यही तो जिन्दगी है कि कुछ चीज़े बिल्कुल आपके खिलाफ और आपके इच्छा के विपरीत होती ही हैं। […]

कविता

हमने इश्क़ नही बनारस किया था

एक दूसरे के हर आदतों को, बनारस के कण कण में महसूस किया था। बनारस की विविधता ने हमे, साथ बिताने को कितने खूबसूरत लम्हे दिया था। उन लम्हों को हमने भी क्या खूब जिया था। सच में हमने इश्क़ नही बनारस किया था। मै काशी विश्वनाथ के पुरानी दीवारों सा था, और वह उन […]

सामाजिक

युवा अर्थात् वायु

युवा का उल्टा होता है “वायु”-अर्थात जो वायु के वेग से चल सके, जिसके मन में उत्साह हो, उमंग हो, जो जीवन का कोई लक्ष्य निर्धारण किया हो और लक्ष्य प्राप्ति के लिये दृढ़ संकल्प हो वह युवा है, युवा वर्तमान है, जो खुद को बेहतर बनाने के लिये जो सोचता और करता है वह […]