रुकने का क्या काम
कदम बढ़ायें चलते जाएँ रुकने का क्या कामसुबह भी आएगी राहों में कब तक रहेगी शाम गढ़ते आये स्वप्न सलोने
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Read Moreआज का समाज दिखावे की संस्कृति में गहराई तक डूब चुका है। हाल ही में iPhone 17 की बिक्री के
Read Moreमुट्ठीभर धूल हूँ मुझको उड़ा दोबात-बेबात ही कोई सज़ा दो दोष जग में किसी का हो, लेकिनदोष सारा, सुनो, मेरा
Read Moreजीवन जग में हरि रूप अनंतरसजा-समाया सदैव मन भीतर रहे बाट जोहे जीवन भरआज हुआ संपूर्ण अति सुंदर राम मेरे
Read Moreसुख में स्वप्नों की निर्झरिणीचंचल चप्पल चतुर कोई हिरणी देखो मन मयूर का क्रंदनजन्मों जन्मों का यह स्कंदन यात्रा नहीं
Read Moreढूंढ़ते रहते हो दर-ब-दर जिसको तुमरुख़ से ओझल वो तुम्हारी हँसी हूँहाँ मैं परी हूँ ख्वाबों खयालों उजालों की चाहत,लबों
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