काश दिख जाये
मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि अपनी मौत कैसे देखूं, हां देखना है यार मुझे बनिस्पत इसके कि कोई
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Read Moreमैं चकित हूं, हैरान हूं, और निराश हूं, कि जिन्हें काट डालने थे हर बंधन स्वेच्छा से वे अपना लिए
Read Moreशिक्षक महोदय आज सेवानिवृत्त हो रहे थे, मगर वे खामोश थे, अंदर चल रहे मनोभावी तूफानों से वे विचलित तो
Read Moreअब इसे कहूं तुम्हारी हताशा या लहू से हाथ रंगने का जुनून, बड़ी आसानी से बोल रहा है कि मैंने
Read Moreजिंदगी कब कब घटती है? अरे भई परेशान होने की जरूरत नहीं जिंदगी रोज घटती है, लेकिन एक पिता की
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