मननशील
मैं जिसके ध्यान मेंहरदम मग्न रहता हूँउसको सारे जगत कानिरंतर ध्यान रहता है। मैं जिसके मोह मेंसब कुछ भुला बैठा
Read Moreक्यों?अब टूट गयाअहम का वहमतुम तो कहते थेसब कुछ मैं ही हूं। मेरे इशारे पर हीसब चलता हैमैं न चाहूं
Read Moreमृत्यु योग बनता रहापर मेरे महाकालकाल का भक्षण करते रहे। शत्रु योग बनता रहापर मेरी मां कालीशत्रुओं का रक्त पान
Read Moreकांगड़ा के युवा कवि लेखक डॉ राजीव डोगरा की कविताएं दो किताबों में प्रकाशित हुई है। पहली किताब ‘नव संवत्सर’
Read Moreकौन जाने मेरे सतगुरुतुम बिन मुझ कौन जाने।कौन तारे मेरे सतगुरुतुम बिन मुझ कौन तारे।कौन संभाले मेरे सतगुरुतुम बिन मुझ
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