बेरहम
सिफारिश-ऐ-दौर चला है
अपनों की जगह
कोई ओर चला है।
खुदगर्ज-ऐ-दौर चला है
निस्वार्थी मनुज की जगह
मतलबखोरों का क्षण चला है।
बेवफ़ा-ऐ-दौर चला है
महोब्बत की जगह
रूप सम्मोहन का काल चला है।
मलाल-ऐ-दौर चला है
हमदर्द की जगह
बेदर्द इंसा का वक़्त चला है।
जहालत-ऐ-दौर चला है
संज्ञान की जगह
अविद्या का अंधकार का चला है।
— डॉ. राजीव डोगरा
