Author: रमेश कुमार सिंह 'रुद्र'

पद्य साहित्य

क्या पता ये क्यों इन्सान के रुप में पत्थर बन जन्म लिया है।

क्या पता ये क्यों इन्सान के रुप में पत्थर बन जन्म लिया है। पत्थर की भी मूर्तियां किसी की बेबसी

Read More
पद्य साहित्य

तब-तक जिन्दगी यूँ ही इस दुनिया में भटकती रह जायेगी।

तब-तक जिन्दगी यूँ ही इस दुनिया में भटकती रह जायेगी। जब-तक अधिकारी अपने अधिकार को समझ नहीं पायेगे। किसी की

Read More