ओ प्रिये ….
ओ प्रिये!! तुम कहाँ हो! बसंती हवाएं चल रही है, सभी के मन को भा रही है, सारी कलियां खिल
Read Moreओ प्रिये!! तुम कहाँ हो! बसंती हवाएं चल रही है, सभी के मन को भा रही है, सारी कलियां खिल
Read Moreजिन्दगी की क्या खता, कि हम लोग बिछड़ गये। आप हैं वहाँ, हूँ मैं यहाँ ये किस मोड़ पर आ
Read Moreतिनका-तिनका बनकर हवा में दूर गया। लिए अपनापन था मगर वो दूर गया। अजीब सा सुरूर वो मुझको दे गया
Read Moreमैं दुनिया का सैर करूँ यह मेरी तमन्ना है। जीवन भर स्नेह लुटाऊ यह मेरी तमन्ना है। सपनों को हकीकत
Read Moreवो रात दूसरी थी ये दिन दूसरा है ••••••••••••••••••••••••••••• वो रात दूसरी थी ये दिन दूसरा है वो बात दूसरी
Read Moreदेखते देखते तूँ कली बन सवरने लगी। फूल बनकर हर गली में महकने लगी। इस सुगंध का ऐसा असर हुआ
Read Moreराह पर राहगीर बनाकर भेज दिया मुझको। चलता रहा दिन-रात कोई ना मिला मुझको। यहसास हो रहा तुम हर-पग-पर हो
Read Moreजब सूर्य की, रोशनी के चले जाने के बाद होने लगती है साम धीरे -धीरे अंधेरा का पहरा होने लगता
Read Moreमैं देखा- कई सड़को पर चिकने रास्ते पर बना दिये जाते हैं। पगडण्डी की तरह, एक मेड़ जबकि – सरकार
Read Moreआज की नारी अबला नहीं है सबला हैं। हर वक्त अपनी कदम बढ़ाती अगला हैं। यहाँ प्राचीन काल में भी
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