Author: प्रो. आरके जैन 'अरिजीत'

सामाजिक

संकट में समाधान नहीं, संस्कृति का निर्माण — फैमिली पूलिंग

हर्मुज जलडमरूमध्य में भड़कती भू-राजनीतिक आग जब पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को हिला रही है और अंतरराष्ट्रीय बाजार

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पर्यावरण

नदी नहीं, अपनी संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों को बचा रहे हैं श्रमवीर

अनादि काल से जनजीवन, संस्कृति और सभ्यता को जीवनरस प्रदान करने वाली वेत्रवती आज पुनर्जागरण की दिव्य चेतना बनकर पुनः

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राजनीति

पीआईएल 2.0 : स्वार्थ, सुर्खियाँ और प्रतिशोध का मिला-जुला रूप

जब न्याय के द्वार समाज के कमजोर और उपेक्षित वर्ग के लिए बंद प्रतीत होने लगे, तब जनहित याचिका यानी

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राजनीति

आर्थिक शक्ति बढ़ रही है, पर बौद्धिक शक्ति सीमाएँ लाँघ रही है

जब दुनिया की अर्थव्यवस्था अदृश्य संबंधों से नई दिशा गढ़ती है, तब भारत वह धुरी बनकर उभरता है जहाँ प्रवासन

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शिक्षा एवं व्यवसाय

कौन जवाब देगा नीट की इस लगातार बिगड़ती व्यवस्था का?

कड़े नियमों, डिजिटल निगरानी और सुधार के दावों के बावजूद जब परीक्षा व्यवस्था बार-बार संदेह में आ जाए, तो नीट-यूजी

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राजनीति

साधारण जीवन के असाधारण अर्थ: जब आदतें बन जाएँ राष्ट्रधर्म

अंतरराष्ट्रीय राजनीति के क्षितिज पर जब अस्थिरता और संघर्ष की परछाइयाँ लगातार घनी होती जा रही हैं, तब ऊर्जा संसाधनों

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राजनीति

तमिलनाडु में उभरता ‘थिंक टैंक शासन’ : क्या बदलेगा लोकतंत्र का चेहरा?

तमिलनाडु की राजनीति इस समय केवल सरकार बदलने की कहानी नहीं लिख रही, बल्कि राजनीतिक संस्कृति के पुनर्जन्म का दृश्य

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सामाजिक

अनाज के ढेर पर बैठी भूखी दुनिया : विकास मॉडल की सबसे भयावह सच्चाई

सभ्यता की चकाचौंध के बीच दुनिया एक खामोश त्रासदी जी रही है। खेतों में रिकॉर्ड अनाज उग रहा है, खाद्य

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स्वास्थ्य

भारत — मेडिकल टूरिज्म नहीं, स्वास्थ्य पुनर्जागरण का भारतीय मंदिर

स्वास्थ्य क्रांति के वैश्विक मानचित्र पर भारत अब निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। दुनिया जहां महंगे इलाज और सीमित सुविधाओं से

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पर्यावरण

प्रकृति की मूक चीख: एक पौधा हमें बचा सकता है, हम उसे बचा नहीं पा रहे

प्रकृति की गोद में रची-बसी भारतीय धरती आज भी जैव-विविधता के अनगिनत रहस्यों को अपने भीतर समेटे हुए है, और

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