Author: *डॉ. रूपचन्द शास्त्री 'मयंक'

गीत/नवगीत

गीत : ढंग निराले होते जग में मिले जुले परिवार के

ढंग निराले होते जग में, मिले जुले परिवार के। देते हैं आनन्द अनोखा, रिश्ते-नाते प्यार के।। चमन एक हो किन्तु

Read More
बाल कविता

बालकविता “सारा दूध नही दुह लेना”

मेरी गैया बड़ी निराली, सीधी-सादी, भोली-भाली। सुबह हुई काली रम्भाई, मेरा दूध निकालो भाई। हरी घास खाने को लाना, उसमें

Read More
बाल कविता

बालकविता “पढ़ना-लिखना मजबूरी है”

मुश्किल हैं विज्ञान, गणित, हिन्दी ने बहुत सताया है। अंग्रेजी की देख जटिलता, मेरा मन घबराया है।। भूगोल और इतिहास

Read More