गीतिका/ग़ज़ल समीर द्विवेदी नितान्त 03/07/2021 ग़ज़ल डर मुझे कुछ नहीं जमाने का..।। डर है बस तेरे रूठ जाने का..।। वो न कश्ती में मेरे साथ चलें.. Read More
गीतिका/ग़ज़ल समीर द्विवेदी नितान्त 18/05/2021 ग़ज़ल खेल तो हरि हाथ में है सब नितान्त मन मुताबिक काम होता कब नितान्त अब भला वो क्यों यहाँ पर Read More
गीतिका/ग़ज़ल समीर द्विवेदी नितान्त 16/02/2021 ग़ज़ल मैं न जाऊँगा ये कहते हो मगर जाओगे..।। माना कुछ देर अभी और ठहर जाओगे..।। मैं तो सागर हूँ न Read More
गीतिका/ग़ज़ल समीर द्विवेदी नितान्त 16/02/2021 ग़ज़ल जानता हूँ इस भँवर से मैं निकल सकता नहीं..।। देख कर तूफाँ मगर रूख भी बदल सकता नहीं..।। माना करूणा Read More