प्रेम को नहीं, चाह प्रेम की
प्रेम पथिक हूँ, प्रेम ही पथ है, प्रेम ही है गंतव्य हमारा। प्रेम को नहीं, चाह प्रेम की, प्रेम ही
Read Moreप्रेम पथिक हूँ, प्रेम ही पथ है, प्रेम ही है गंतव्य हमारा। प्रेम को नहीं, चाह प्रेम की, प्रेम ही
Read Moreगोल गोल गोलाइयाँ सुंदर, गहराइयों में समंदर हो। भले ही सुंदर वस्त्र तुम्हारे, तुम उनसे भी सुंदर हो।। फोटाे बहुत
Read Moreसहते सहते, सहनशील सह, आक्रोश नहीं अवशेष रहा है। नहीं किसी की चाह रही अब, नहीं किसी से द्वेष रहा
Read Moreछल, कपट, धोखे की पुतली, कमाल कालिमा लगती हो। छल, छद्म की छवि सुंदर, षड्यंत्र लालिमा सजती हो।। काजल कीचड़
Read Moreरिश्ते बनाकर, धन यूँ कमाना, तुम्हीं को जँचता है। रिश्ते की जड़ों में मट्ठा डालना, तुम्ही को फबता है।। प्रेम
Read Moreधोखे की हो, पुतली सुंदर, प्रेम कपट, ये याद रहेगा। कुशल शिकारी हो तुम प्यारी! शिकार बने हम, याद रहेगा।।
Read Moreजहाँ प्रेम का मरहम लगता, चोट सभी भर जाती हैं। अंधकार की रात बीतती, चिढ़ियाँ फिर से गाती हैं। इक
Read Moreगलती को स्वीकार, सुधारे, आगे वह ही बढ़ पाता है। सच और विश्वास जहाँ हो, वह ही रिश्ता चल पाता
Read Moreसमाज सेवा और परोपकार के नाम पर घपलों की भरमार करने वाले महापुरूष परोपकारी होने और दूसरों के लिए जीने
Read Moreव्यक्ति कभी भी गलत न होता, गलत सदैव कारण होते हैं। दोषारोपण कर ओरों पर, हम पाक साफ बन कर
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