हर घर का वह बेवकूफ बड़ा बेटा”
हर घर की दीवारें अपने भीतर बहुत कुछ समेटे होती हैं—खुशियाँ, तकरार, उम्मीदें और त्याग। लेकिन उन सबके बीच कहीं
Read Moreहर घर की दीवारें अपने भीतर बहुत कुछ समेटे होती हैं—खुशियाँ, तकरार, उम्मीदें और त्याग। लेकिन उन सबके बीच कहीं
Read Moreसाहित्य न बिकता है, न झुकता है,वह तो भीतर की लौ में सुलगता है।ना नाम के पीछे, ना दाम के
Read Moreसाहित्य आज साधना नहीं, सौदेबाज़ी का बाज़ार बनता जा रहा है। नकली संस्थाएं ₹1000-₹2500 लेकर ‘राष्ट्रीय’ और ‘अंतरराष्ट्रीय’ पुरस्कार बांट
Read Moreबेचारा पौधा एक,फोटो में पच्चीस लोग। किसी ने पकड़ा गमला,तो किसी ने थामी टहनी,किसी ने मुस्कान ओढ़ी,तो किसी ने झलकाई
Read Moreपौधे उगते हैं अब केवल स्टेटस की ज़ुबानों में,धूप तप रही है सच में, साया है अफसानों में। हरियाली की
Read Moreपाँच साल पहले कोविड-19 लॉकडाउन ने जहां दुनिया की अर्थव्यवस्था को झकझोरा, वहीं पर्यावरण को राहत दी। वायु प्रदूषण, ग्रीनहाउस
Read More“गांव वही है, खेत वही हैं, माटी की महक पुरानी,पर उसमें अब प्राण नहीं हैं, न वह बात रही कहानी।बेटे
Read Moreजीवन के इस सफ़र में,हर मोड़ पर कोई न कोई साथ छोड़ देता है,कभी उम्मीद, कभी लोग —तो कभी ख़ुद
Read More(आत्महत्या जैसे विचारों से जूझते मन के लिए) ज़िंदगी जब करे सवाल,और उत्तर न मिले हर हाल,तब भी तुम थक
Read Moreसाँस-साँस को मोहताज किया,जीवन को नीलाम किया।मासूम थी, बस एक साल की,फिर भी व्यवस्था ने इनकार किया। “वेंटिलेटर चाहिए?” —
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