जनता की बात नहीं सुनते संपादक, फिर किसके लिए हैं अखबार?
जब लोकतंत्र का प्रहरी—संपादक—जनता से संवाद बंद कर दे और सत्ता का दरबारी बन जाए, तब पत्रकारिता दम तोड़ने लगती
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Read Moreएक कर्मचारी 60 साल काम करने के बाद भी पेंशन के लिए तरसता है, जबकि एक नेता 5 साल सत्ता
Read Moreजब तक विधायक, मंत्री और अफसरों के बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ते रहेंगे, तब तक सरकारी स्कूलों की हालत नहीं
Read Moreआन-बान थे देश की,उधम सिंह सरदार।‘सौरभ’ श्रद्धा सुमन रख,उन्हें नमन शत बार।। वैशाखी की क्रूरता,लिए रहे बेचैन।ओ डायर को मारकर,मिला
Read Moreहरियाणा में शिक्षक ट्रांसफर नीति वर्षों से ठंडे बस्ते में पड़ी है, जबकि सरकार ने CET परीक्षा मात्र एक महीने
Read Moreकांवड़ उठाए घूम रहा है,कंधों पे धर्म लादे जा रहा है,गांव का होनहार मर गया,माँ बेटे की राख छू रही
Read Moreजो शिक्षा से जले, वही सरकार में बैठे हैं,यही कारण है कि स्कूल अब श्मशान जैसे हैं। ये कौन लोग
Read Moreहर शहर, हर गली, हर मोहल्ले में, जब बच्चे और किशोर पतंग उड़ाने निकलते हैं, तो उनका उद्देश्य केवल आसमान
Read Moreहरियाणा में आयोजित CET परीक्षा ने 15 लाख अभ्यर्थियों को 100-150 किलोमीटर दूर केंद्रों पर भेजा, जिससे भारी मानसिक, शारीरिक
Read Moreहरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (HSSC) के चेयरमैन हिम्मत सिंह का हालिया बयान कि “चारों शिफ्ट के एग्जाम पूरे न होने
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