डिजिटल संप्रभुता की वैश्विक लड़ाई : डेटा, शक्ति और राष्ट्रीय नियंत्रण
इक्कीसवीं सदी की विश्व-राजनीति में शक्ति की परिभाषा बदल चुकी है। कभी सैन्य क्षमता और प्राकृतिक संसाधन शक्ति के प्रमुख
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Read Moreलोकतंत्र की मूल शक्ति नागरिक की स्वतंत्र और सूचित पसंद में निहित होती है। चुनाव केवल मतदान की प्रक्रिया नहीं,
Read Moreकृत्रिम मेधा (Artificial Intelligence) ने सूचना तक पहुँच के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। पहले खोज इंजन केवल
Read Moreडिजिटल युग में सूचना की गति जितनी तेज़ हुई है, उतनी ही तेज़ी से उसके स्वरूप में परिवर्तन भी आया
Read Moreभाषा केवल संवाद का साधन नहीं होती, वह किसी समाज की चेतना, संस्कृति और इतिहास का प्रतिबिंब होती है। मनुष्य
Read Moreआज मन कुछ रुका, कुछ ठहरा सा है,खिन्न नहीं— मौन में कुछ गहरा सा है।अध्यात्म ने वाणी को थोड़ा थाम
Read Moreआज दुनिया केवल डिजिटल युग में नहीं जी रही है, बल्कि एक ऐसे डिजिटल मोड़ पर खड़ी है जहाँ सूचना
Read Moreआज का युवा ऐसे समय में बड़ा हो रहा है, जब दुनिया उसकी हथेली में सिमट आई है। मोबाइल फोन
Read Moreइक्कीसवीं सदी का मनुष्य जितना तकनीकी रूप से सक्षम हुआ है, उतना ही भावनात्मक रूप से अकेला भी होता जा
Read Moreअंधियारे में डूबा दिख रहा है सम्पूर्ण संसार,भविष्य में दिख रहा हर ओर बस अंधकार।कहीं है महामारी तो कहीं है
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