Author: डॉ. शैलेश शुक्ला

विज्ञान

मौलिक रचनात्मक कौशल को समाप्त कर रहा है कृत्रिम मेधा का अत्यधिक प्रयोग

मानव सभ्यता के इतिहास में लेखन केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं रहा, बल्कि वह मनुष्य की चेतना, संवेदना, स्मृति और

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शिक्षा एवं व्यवसाय

हिंदी पत्रकारिता में महिलाएं : 200 साल बाद भी अधूरी यात्रा

जब 1826 में पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने कलकत्ता से ‘उदंत मार्तंड’ का प्रकाशन किया, तो यह सिर्फ एक अखबार

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राजनीति

लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करना देशद्रोह नहीं होता

किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की वास्तविक शक्ति केवल चुनावों, संसदों और संवैधानिक संस्थाओं से निर्धारित नहीं होती, बल्कि इस बात

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शिक्षा एवं व्यवसाय

सफल लोकतंत्र के लिए पत्रकारों की स्वतंत्रता अनिवार्य

किसी भी लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति उसकी संसद, न्यायपालिका या चुनाव प्रणाली भर से निर्धारित नहीं होती, बल्कि इस बात

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भाषा-साहित्य

हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों में हिंदी पत्रकारिता का अखिल भारतीय विस्तार

हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्षों की यात्रा भारतीय समाज, लोकतंत्र और सांस्कृतिक चेतना के विकास की एक सुदीर्घ, जटिल

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भाषा-साहित्य

हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों में हिंदी का वैश्विक विस्तार

हिंदी पत्रकारिता के लगभग 200 वर्षों का इतिहास केवल भारत की सीमाओं में विकसित एक भाषाई परंपरा का इतिहास नहीं

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राजनीति

कलम की कसक और लोकतंत्र की ललकार : प्रेस स्वतंत्रता पर बढ़ते प्रश्न

भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक राष्ट्र में प्रेस की स्वतंत्रता केवल पत्रकारों का विषय नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र की गुणवत्ता,

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