ज्यों-ज्यों डूबे, स्याम रंग (व्यंग्य)
कुछ लोगों का जन्म विरोध की कोख से होता है। वे तलवार की धार पर गर्दन रखेंगे। कुल्हाड़ी पर पैर
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Read Moreमैं बचपन से बहुत झूठ बोलता हूँ। लेकिन सत्याग्रह करने से कभी नहीं डरा। इस मामले श्रीकृष्ण मेरे आदर्श रहे।
Read Moreविद्वान कहते हैं कि इस जगत में सब नश्वर है। गलत बात। एक चीज़ और है जो शाश्वत, अजर, अमर
Read Moreदेश पाषाण युग की ओर लौट रहा है। पाषाण उत्सव मना रहा है। पत्थर में भगवान तलाशे जा रहे हैं
Read Moreखून सने हाथों को, जीवन देना होगा ठीक नहीं भारत माँ के गद्दारों की, साँसें चलना ठीक नहीं जिसकी बंदूकों
Read Moreएक ऐसी वस्तु का नाम बताइए जो खाने के भी काम आती है और पहनने के भी? चकरा गए? मैं
Read Moreकठिन डगर है, कोई न साथी, पर तुम ना घबराना अंधियारा भी हो जाए तो, लक्ष्य को भूल ना जाना।
Read Moreजिसे सुलाया बाँहों में और पलकों की छाँव में मैं नहीं सोच सकता हूँ मेरी बिटिया तुझे बिलखता, नहीं देख
Read Moreआँसुओं को मैं ईंधन बनाती रही तेरी यादों के दीपक जलाती रही। होंठ हर पल तेरा नाम गाते रहे मुस्कुराते
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