लेखन-कर्म यानि?
पिछले तीन चार दशकों से हाथ से लिखना काफी कम हो गया है। शिक्षा संस्थानों और सरकारी कार्यालयों में हाथ
Read Moreपिछले तीन चार दशकों से हाथ से लिखना काफी कम हो गया है। शिक्षा संस्थानों और सरकारी कार्यालयों में हाथ
Read Moreयुरोप, अमरीका, आस्ट्रेलिया, इजरायल, सिंगापुर, जापान आदि की शानो-शौकत, विलासितापूर्ण, सर्वसुलभ सुविधासंपन्न जिंदगी यदि दुनिया के सभी देशों को देनी
Read Moreजो व्यक्ति बदलना नहीं चाहते हैं, उन पर मेहनत करना बेकार है! ऐसे व्यक्तियों पर मेहनत करना अपनी स्वयं की
Read Moreसमझने वाले बिना समझाये भी समझ जाते हैं और नहीं समझने वाले समझाने से भी नहीं समझते. यह दुनिया ऐसी
Read Moreलडखडाते पैरहिलते हुये हाथहर रिश्ते में जैसेहो गये हैं अनाथ झुकी हुई गर्दनवाक् मौन सीपूछने में अशक्तजिंदगी कौनसी सपने अधूरे
Read Moreश्रीमद्भगवद्गीता पर सैकड़ों प्रसिद्ध तथा सैकड़ों अप्रसिद्ध अनुवाद, व्याख्याएँ, टीकाएँ,भाष्य आदि पचासों भाषाओं में हमारे समक्ष उपलब्ध हैं! तुलसीदास की
Read Moreआजादी के पश्चात् हमारे धर्माचार्यों को भी धर्म की अपेक्षा राजनीति में रस अधिक लग रहा है! इसीलिये तो धर्माचार्य
Read Moreधर्मगुरुओं द्वारा जब -जब धर्म, अध्यात्म, योग, कर्मकांड की आड में पाखंड, ढोंग, शोषण, भेदभाव, ऊंच -नीच का गंदा खेल
Read Moreआजकल इन तीन शब्दों को खूब मजाक का विषय बना दिया गया है तथा दुःखी हृदयों से लोगों की सहज
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