उपन्यास : देवल देवी (कड़ी 42)
38. स्वधर्म स्थापना हेतु शील बलिदान आहट सुनकर देवलदेवी शय्या से उठकर खड़ी हो गई। कक्ष में शहजादा खिज्र खाँ आ
Read More38. स्वधर्म स्थापना हेतु शील बलिदान आहट सुनकर देवलदेवी शय्या से उठकर खड़ी हो गई। कक्ष में शहजादा खिज्र खाँ आ
Read More37. बलात् समर्पण की रात्रि देवलदेवी फूल, कलियों, रत्न और जवाहरात से सजी शय्या पर बैठी है। उसकी देह इत्र की
Read More36. रामदेव, शाही हरम में सुल्तान अलाउद्दीन की पुत्री और अपने पुत्र के निकाह के जलसे में दो घोषणाएँ करता है।
Read More35. सुल्तान और नायब ”काफूर, दिल्ली सल्तनत के जांबाज सिपहसालार दक्खन पर तुम्हारी विजय ने हमारा सिर फर्ख से बुलंद कर
Read More34. सखी से मंत्रणा दिल्ली के शाही हरम में गुजरात की जबरन अपहृत की गई राजकुमारी देवलदेवी का कक्ष। अब वहाँ
Read More33. वीर पुत्र का दुर्बल पिता 1306 में देवलदेवी को हिरासत में लेने के बाद गुजरात के सुबेदार अल्प खाँ और
Read More32. अपभ्रष्ट शहजादा सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी का सबसे बड़ा पुत्र खिज्र खाँ जो रात दिन सिर्फ अफीम और मद्यपान करके यौनसुख
Read More31. कटु संवाद दिल्ली सल्तनत का शाही हरम का एक कक्ष, बिना साज-श्रृंगार के। कक्ष में न तो शय्या है और
Read More30. मधुपर्व गुर्जर राजकन्या देवलदेवी के दुर्भाग्य के आरंभ से ठीक पूर्व जब वह यादव युवराज शंकरदेव के प्रेमपाश में बंधी
Read Moreघोड़े पर सवार जिरह बख्तर पहने अल्प खाँ राजकुमार को देखकर चिल्लाकर कहता है ”अरे ओ काफिर, तू तो अभी बच्चा
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