गीतिका/ग़ज़ल त्रिलोक कौशिक 03/03/202403/03/2024 ग़ज़ल मर्यादा हूँ , मान की तरह , रहती हूं।पूजन ,अर्चन,ध्यान की तरह रहती हूँ। झील -सरीखी आँखें सूख गई हैं Read More