यतो अधर्मः ततो जयः
परित्राणाय पापीनां, विनाशाय च सुकृताम I अधर्मसंस्थापनार्थाय ,संभवामि नित्यप्रतिम II आजकल सत्य का प्रतिष्ठान धूल-धूसरित और उपेक्षित हो गया है
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Read Moreमेरा गांव भी देश के अन्य गांवों की तरह अनेक जातियों का संगम स्थल है I पहले सभी लोग मिलजुलकर
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