कविता
शेष शब्दों का भारप्रतिध्वनि की पुकारअंतरात्मा विह्वल हुईसुनकर करुण चीत्कार इंसान की प्रकृति वहीनिष्क्रियता को न चाहेमन का गुरूर अहंकारवेदना
Read Moreसृजन का नव दीप जलाकर निरुत्साह के तिमिर को भगाती रहूँ साहस के सिन्धु से माँ शारदे काव्य सागर में
Read More