प्रेम
प्रेम को परिभाषित करें ऐसी कोई भाषा नहीं प्रेम को अभिव्यक्त करें ऐसी कोई अभिव्यक्ति नहीं प्रेम का वर्णन कर
Read Moreसंजय शाम को जब दफ्तर से आया तो थोड़ा बुझा-बुझा सा लगा। छाया को तुरंत कुछ पूछना अच्छा नहीं लगा
Read Moreआज हिमालय की दुर्दशा पर प्रकृति आंसु बहाती है सूखी नदियां सूखे जलाशय मानव विकास की गाथा सुनातीं पहाड़ों के
Read Moreबाज़ारवाद के माहौल में बिकती है हर चीज सही! क्या निर्जीव, क्या सजीव सभी के मोल लगते हैं सही! मान-मर्यादा
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