गीतिका/ग़ज़ल

यकीं करूं

तेरे होने पर यकीं करूं
या तेरे न होने पर यकीं करूं!
ऐ खुदा तू बता जरा
मैं किस बात पर यकीं करूं!
तू साथ है फिर भी पास नहीं
तेरे साथ का एहसास कैसे करूं!
गर उजाला है कहीं तो अंधेरा भी है
इस अंधेरे उजाले पर यकीं कैसे करूं!
जिंदगी के सुख-दुख की राहों पर
सिर्फ सुख का आसरा कैसे करूं!
खुशियां सभी अपनी झोली में समेट लूं
तो अपना गम किसके हवाले करूं!
इसी कसमकस में हूं
तेरे होने पर यकीं करूं न करूं!
— विभा कुमारी “नीरजा”

*विभा कुमारी 'नीरजा'

शिक्षा-हिन्दी में एम ए रुचि-पेन्टिग एवम् पाक-कला वतर्मान निवास-#४७६सेक्टर १५a नोएडा U.P