अवसाद
ये अवसाद के काले बादल न जाने कब छटेंगे आशा की स्वर्णिम धूप न जाने कब खिलेगी ? इन स्याह
Read Moreआराम भी क्या कमाल की चीज़ है सुकून से रहना भी बेमिसाल चीज़ है! सर्द सर्दियों के स्याह रातों में
Read Moreसर्द सर्दियों की रातों में रजाई में दुबकना अच्छा लगा हैं वो तेरा अपनी बाहों में मुझे समेटना अच्छा लगता
Read Moreआस का पंछी है छलिया जो रह-रह छल जाता है नभ में कहीं नजर नहीं आता फिर भी होता है
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