कविता – 2
सुबह की हवाओं नेखूबसूरत सुहाने मौसम मेंसूरज का पट खोल दियाजिसे देखकर पूरी सृष्टीका सवेरा हो गयामंद मंद पवनों के
Read Moreवर्षा की बूंदो से नदिया उमड़-घुमड़ भर जाती हैं कल-कल ध्वनि मे नदिया अपनी गीत सुनाती हैं देख जवानी नदियो
Read Moreब्यथा अपने मन की बताऊ तो किसे बताती भी हू तो बताकर क्या करू आज के इस दौर मे उलझन
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