गीतिका/ग़ज़ल

डोलियों से

जनाज़े जा रहे हैं डोलियों से कि वो मारी गईं हैं गोलियों से अगर वो लोग भी शादी करेंगी कहेंगी कुछ न वो हमजोलियों से अदालत भी ख़डी तकती रहेगी वो मुझको मार देगा बोलियों से अमीरे शहर से परहेज़ करना जो चाहो मांग लेना झोलियों से बड़े दिन बाद ये मुमकिन हुआ है ग़ज़ल […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल – ले गया था

वो आंखों का भी मंज़र ले गया था मेरा आंसू समंदर ले गया था कभी उसकी ज़मींदारी रही थी गया तो सिर्फ बिस्तर ले गया था ये सच है जीत ली थी उसने दुनिया मगर फिर क्या सिकंदर ले गया था अजब उल्फत उसे महबूब से थी लगा जो सर पे पत्थर ले गया था […]

बाल कविता

बाल कविता

सुनो न मम्मी बात ज़रा सी देखो मुझको हो गई खांसी ये दुख भी क्या कम है मेरा जमा हुआ बलग़म है मेरा कुछ -कुछ देखो सर्दी भी है नाक से आता पानी भी है दर्द भी रुक कर बढ़ जाता है शाम में फीवर में चढ़ जाता है ये सब सुनकर बोली मम्मी गुस्से […]

बाल कविता

सॉरी बोला

इक बच्चे में थी बदमाशी मिलती कैसे फिर शाबाशी स्कूल जब भी वो जाता था कुछ न कुछ वो कर आता था कभी फूल को तोड़े जाकर फेक दे जूठा खाना खाकर डेस्क पे क्या क्या लिख देता था नाम न खुद का वो लेता था ब्लेक बोर्ड भी गन्दा कर दे पानी से सब […]

गीतिका/ग़ज़ल

बाजारी रहेगी

ये जब तक उनमें बीमारी रहेगी सियासत की तरफदारी रहेगी हम उसमें ढूंढते ही सच रहेंगे वो बातें सिर्फ अखबारी रहेगी ग़रीबों से कहां का वास्ता है तुम्हारी बस अदाकारी रहेगी रहेंगे जब तलक नस्लों के झगड़े जहां तक हो महामारी रहेगी दिखाएंगे भला हम क्या हुनर को अगर हर चीज बाज़ारी रहेगी नज़र से […]

गीतिका/ग़ज़ल

रहती हैं

शाम में बदलियां भी रहती हैं कुछ न कुछ तल्खियां भी रहती हैं बेतकल्लुफ न घर से तुम निकलो छत पे कुछ लड़कियां भी रहती हैं यों न झटके से पास लाओ मुझे कान में बालियां भी रहती हैं कितनी बातों को तुम छुपाओगे हाथ में चूड़ियाँ भी रहती हैं बैठ जाता हूं बात सच […]

गीतिका/ग़ज़ल

ये फ़न सीखा है

वो इक वक़्फ़ा ही लेकिन पास आकर चला आ जाता है वो मुझको हंसाकर किसी के दिल को कैसे जीतना है ये फ़न सीखा है हमने मुस्कुराकर नहीं हम चालबाज़ी कर रहे हैं वो क्या देखेंगे मुझको आज़माकर मोहब्बत में गुज़ारें उम्र अपनी चलो हम फेक दें नफ़रत उठाकर यक़ीनन वो भी फिर मजबूर होगा […]

गीतिका/ग़ज़ल

चाहता है

मेरी मेहनत पे जीना चाहता है वो मेरा ख़ून पीना चाहता है संवरना है मुझे भी आईने में किसी का दिल हसीना चाहता है ग़रीबी इतनी अंदर आ गई है फटा कपड़ा भी सीना चाहता है वही जिनसे हमारी दोस्ती थी हमारा ख़ून पीना चाहता है बड़ी उल्फ़त से माँ को रख रहा है वो […]