रिश्वतखोरी : शर्मसार करते रिचार्ज
अंतिम सांस गिन रहीं हैं इंसानियत,रिश्वतखोरों की पौ बारह वहशियत।मौत मुनाफे की दुकानों पे नाच रहीं,दुनिया भयानक उत्सव देखती रहीं।
Read Moreअंतिम सांस गिन रहीं हैं इंसानियत,रिश्वतखोरों की पौ बारह वहशियत।मौत मुनाफे की दुकानों पे नाच रहीं,दुनिया भयानक उत्सव देखती रहीं।
Read Moreएक हाथ से ताली बजाने वालों,ध्यान से मेरी बात सुनो—तुम्हें कभी न कभीज़रूरत पड़ेगीदूसरे हाथ की…साथियों के साथ की… जब
Read Moreगिरती है जब बर्फचमक उठते है पहाड़सफेद चादर से ढकेआंखे चुंधिया जाती है देख करपहाड़ी के लिए आम है बर्फ
Read Moreभोर किरण है आशा की यह, मन में जोत जगाती हैं।गीत लिए यह नव जीवन का, मधुर हृदय में गाती
Read Moreसमय-समय की बात है,क्योंकि बदलाव ही प्रकृति का नियम है,जीवन मूल्य भी इससे अछूता कहाँ है।तभी तो आज के जीवन
Read Moreकछुआ और खरगोशएक मंद, एक तेजप्रतियोगिता में स्वयं ही नहीं उतरे थेइन्हें उतारा गया थाकतिपय तत्कालीन छलियों द्वारा। खरगोश यूं
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