कुर्सी गाथा
कुर्सी से सदैव करें, जो भी प्यार दुलारवही नेता स्वयं का, रमेश करें उद्धार कुर्सी छिनने वास्ते, रहता है तैयारहरदम
Read Moreकुर्सी से सदैव करें, जो भी प्यार दुलारवही नेता स्वयं का, रमेश करें उद्धार कुर्सी छिनने वास्ते, रहता है तैयारहरदम
Read Moreआज वृद्ध माँ की मन, देर रात तकबहुत कचोटती रही,जो सदैव सूत की चाह किये।बेटी की उपेक्षाऔर कुलदीपक की इच्छा
Read Moreसुख-दुख तो हैं आते-जाते, जीवन पथ संगीत सुनाते।समझ इसे हम सब कब पाते, बाद बहुत नाहक पछताते।। इसका जीवन खेल
Read Moreसंस्था हित नहीं झगड़े हैं,सब के आपस के झगड़े हैं,यह कोई अफवाह नहीं,संस्था हित परवाह नहीं, मूल बात कुछ और
Read Moreविष केवल साँपों में नहीं,इंसाँ भी उगल जाता है,कटु वचनों की ज्वाला में,अपनों को ही जलाता है। महाभारत की अग्नि
Read Moreतीसरे-चौथे बच्चे पर, अब मिलने लगे इनाम,यूं जनसंख्या की चर्चा में, बदल रहा है काम।कल तक जो कहते थे—“छोटा रखो
Read Moreनशामुक्ति अभियान का बड़ा भव्य आयोजन था,कॉलेज के छात्रों के हाथों में पोस्टर लिये खड़े थे!पोस्टर पर स्लोगन लिखा थानशा
Read Moreनन्हा बच्चा खेल रहा,हँस-हँस कर वो झूम रहा,लाल पैंट और प्यारी शर्ट,सबको कितना भा रहा।नन्हा बच्चा खेल रहा,हँस-हँस कर वो
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