विदेशी है “हाथ”
हर आंदोलन में विदेशी हाथ,ये तो बहुत ही पुराना राग है।जनता पूछ रहीं रोटी का प्रश्न,किसी साज़िश का संवाद है।
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Read Moreशरद पूर्णिमा की रश्मियॉं, अमृत “आनंद” बहाती है,शुभागमन में शरद ऋतु के, प्रकृति गीत गुनगुनाती है । देख आज कण-कण
Read Moreदेश की मिट्टी पुकारे,पर वो सुनते ही नहीं,ज़ख्म गहरे हैं बहुत,पर ख़्वाब बुनते ही नहीं,विकट परिस्थितियों में जिनकी आंखें भीगती
Read Moreपिताएक रिश्ता भर नहीं होताबल्कि एक पूरा जीवन होता हैजो अपने लिए नहींबल्कि जीते है अपने परिवार के लिए ।
Read Moreबेटी का बाप हूँहाँ, एक बेटी का बाप हूँऔर मुझे वंश की दुहाई न दोन उद्धार कीन मुखाग्नि कीमैं कोई
Read Moreक्या रावण का अंत हुआ ?इस प्रश्न का उत्तर हाँ भी है और न भी,फर्क तो बस नजरिए का है।वैसे
Read Moreकब जलेगा मन का रावण?प्रश्न बड़ा विचारणीय हैक्योंकि आज यह प्रश्न हम ही नहींखुद रावण और मित्र यमराज भी पूछ
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