जीना चाहता हूँ
सबकी जरूरत से ज्यादा परवाह की,अपनी चाहतों की एक धार बलि दी,परवाह मुझ पर बहुत ज्यादा हावी हो गई,जिंदगी की
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Read Moreनिर्धन बेटी पदवी पाए तो कहलाए लोहड़ी।उदय सूरज की पगडंडी लेकर आए लोहड़ी। सुख स्मृति आनंद अवस्था शुभ संकल्प बने।वास्तविक
Read Moreशब्दों की सरिताधीरे-धीरे बहती हुईमन को सींचे सुनने के क्षण मेंदूसरों का धड़कन-सत्यधीमे प्रकट हो वाणी के पीछेछिपी हुई भावनाएँकान
Read Moreचंचल चपल चुलबुला बचपन।दिखलाता है कितने ठनगन।। खेल खेलना लगता उत्तम,बचपन से जीवन हो शोभन। अम्मा दादी लाड़ लड़ाएँ,बाबा कहें
Read Moreघोड़ी सजी दूल्हा नहींबारात के बिन बैंड का क्या? हाथ में चिमटा लिए वीरांगना हैउधर दारू में मगन धुत साजना
Read Moreजय, जय, जय हे! भारतमाता।‘वंदेमातरम है ‘पुण्यश्लोककोटिक जन का संबल दाता। जिसके वक्षस्थल गंगाजलहिमगिरि का शोभित मुकुट भाल,जिसके रज –
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