क्षणिकाएं : शब्द श्रंखला- अधर्म
१) सत्य थोड़ी देर चुप कर क्या बैठाअधर्म के तो मानो पंख ही लग गयेखुद बन बैठा वह धर्माचार्यअल्पकाल के
Read More१) सत्य थोड़ी देर चुप कर क्या बैठाअधर्म के तो मानो पंख ही लग गयेखुद बन बैठा वह धर्माचार्यअल्पकाल के
Read More१) शान्ति को कमजोरी न समझनायह है अदम्य शक्ति की निशानीकभी-कभी उज्जवल कल के लिएझुक जाने में कुछ बुराई नही
Read Moreविधा- क्षणिकाशीर्षक- मैं हर्षित कबूतर हूँ, मैं हर्षित कबूतर हूँ,शांति-दूत हूँ,सर्वश्रेष्ठ डाकिया हूँ,अनेक भाषाओं का ज्ञाता हूँ,अनेक भाषाओं मेंअनुवाद भी
Read More१) थोड़ी देर को भले खुश हो जाएअंततः तो उसे हारना ही पड़ेगासूर्य की पहली किरण पड़ते हीतम को कैसे
Read Moreजीवन एक रंगमंच है,हर इंसान मात्र कठपुतली,जिसकी डोर ईश्वर के हाथ में,हर इंसान सिर्फ एक मोहरा है,जिसका नियंत्रण ईश्वर के
Read More१) आते ही मंगल प्रभात की बेलापंछी घोंसला छोड़ चलेबच्चों के लिए लाने दाना-पानीपंख फैला, लम्बी उड़ान भरें । २)
Read Moreक्यों भाई तुम किस पक्ष से हो मैं दोनों ही पक्ष में हूँ अपनी सहूलियत के हिसाब से आता जाता
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