अब भव भाव भरोसे तोरे! (ब्रज)
अब भव भाव भरोसे तोरे,दीखत नियरे जाबत दूरे;हौं अकुलात कबहुँ मुँह फेरे,तुम लखि जात जहाँ दृग मोरे! जाति न पांति
Read Moreअब भव भाव भरोसे तोरे,दीखत नियरे जाबत दूरे;हौं अकुलात कबहुँ मुँह फेरे,तुम लखि जात जहाँ दृग मोरे! जाति न पांति
Read Moreजिसने अन्याय के आगे झुकना नहीं सीखा,जिसने अत्याचारों के आगे रुकना न सीखा।मानवता की पीड़ा को अपना दर्द है बनाया,नवी
Read Moreकिताब हाथों में लेकर बसलहरा देना काफी नहीं,भीड़ में खुद को जन-नायकदिखा देना काफी नहीं,मंच से ऊंचे स्वर में सिर्फ़
Read Moreबहाने मत बनाओझूठी जिंदगी जीने के लिएजिंदगी को मिले हैंकुछ रंगीन पलइसे हवा में मत उछालोएक दिन तूम्हारी औकातशून्य को
Read Moreख़ुश रहने को सब कुछ होना ज़रूरी नहीं,हर ख़्वाब का पूरा होना ज़रूरी नहीं,जो मिला है,उसमें मुस्कुराना सीखिए,हर पल को
Read Moreवो दिन भी कितने अजीब थेजब हम तेरे करीब थे ।ना किसी को पाने की जिद थीना किसी को खोने
Read Moreमक्खी बैठी हो दीवारों पे, या भिनभिनाए कानों में,क्या हथौड़ा लेकर दौड़ेंगे, हम अपने ही मकानों में?रोकना तो राहों को
Read Moreआसान नहीं नास्तिक होना,भीड़ से अलग राह पर चलना,अंधेरे में दीया बनकर जलना,न ईश्वर का खौफ,न अल्लाह का डर,न जिन्न
Read Moreचोर को अवसर दोगे,तो घर का सुकून लूट जाएगा,झूठ को जगह दोगे,तो विश्वास का दीप बुझ जाएगा,लालच को मन में
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