प्रगति, छलावा और रुदन
मैं वो बरबाद इंसान हूंजिनका बरबादियों से नाता रहा है,रखी जिनसे उम्मीदबस देता दिलासा रहा है,राहें चुनी थी मैंने भीअपनों
Read Moreमैं वो बरबाद इंसान हूंजिनका बरबादियों से नाता रहा है,रखी जिनसे उम्मीदबस देता दिलासा रहा है,राहें चुनी थी मैंने भीअपनों
Read Moreमर्दों से मुकाबला करती नारी शराब और सिगरेट पीती है उसका विरोध कैसे करूँ करू भी तो जायज करू कैसे
Read Moreकिसी के दर्द को देखकर,कभी मुस्कुराया न करो,गिरते हुए इंसान का,यूँ मज़ाक उड़ाया न करो।वक़्त का पहिया घूमकर,कब किस ओर
Read Moreअधर्म का छाया था जो अंधियारा,सत्य का सूरज फिर मुस्काया।नवरात्र का अनुष्ठान हुआ पूरा,विजयदशमी का यह पर्व आया।राम के बाणों
Read Moreयूं दलेर बने थे कभी मंचों के सरताज,जब वे गाते थे कभी सुरों में आवाज़।ज़बरदस्त नाम कमाया, शोहरत पाई,फिर क्यों
Read Moreजारी है जापान के नागोया में पॉंचवे एशियन पैरा गेम्स,भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं वहॉं पर हुनर बाज कीमती
Read Moreआया विजयादशमी का त्योहारसंग में लाया खुशियां अपारत्याग कर कम से कम एक विकारऔर अपनाकर सात्विक विचार । अन्तर्मन में
Read Moreतमस के अंधेरों में, जब सत्य भी घबराता है,झूठ बड़े-बड़े मंचों से सच का पाठ पढ़ाता है।कभी कोई तमस फैलाता,
Read Moreशांत निशा का रूप सुहाना,चाँदनी बिखरी गाँव की ओर।कच्ची पगडंडी, बांस के झुरमुट,छप्पर पर है दीप की पोर।शीतल पवन मधुर
Read Moreप्रभु श्रीराम! सुनो पुकार, क्यों सहूँ मैं अग्नि की मार?हर साल मुझे जलाते हो, फिर अगले साल बुलाते हो!मैं रावण
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