कविता

कविता

ज़ख्म मेरा है, तुम्हारा क्या है

नशीली नज़र उसकी मेरी जानिब,मैं मुस्कुराया था,एक हादसा था हुआ, लोगों इसमें तुम्हारा क्या है।उसको है मुहब्बत,मुझसे, मैं भी उससे

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कविता

मेले की रौनक

एक मेले की रौनकबड़ी-बड़ी दुकानों सेनहीं सजती हैमेले मेंगुब्बारेवाला न होखिलौनेवाला न आयेचाटवाला न आयेचूड़ीवाला न आयेझूले न आयेजलेबीवाला न

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