शिशुगीत – २७
१. खाकर निकलें गर्मी में जब भी निकलें कुछ भी खाकर ही निकलें नहीं लगेगी लू इससे नींबू पानी पी
Read More१. खाकर निकलें गर्मी में जब भी निकलें कुछ भी खाकर ही निकलें नहीं लगेगी लू इससे नींबू पानी पी
Read Moreकालू आया, कालू आया, कालू चाचा कुल्फी लाया, नीली-पीली कुल्फी लाया, रामू का भी मन ललचाया. पीली कुल्फी खाऊंगा मैं,
Read More1. होली होली जमकर सभी मनाएँ गुझिया, मालपुए भी खाएँ ध्यान रहे जो नहीं चाहता भूल न उसको रंग लगाएँ
Read More१. बसंत ऋतु बसंत की फिर आयी है बागों में खुशियाँ लायी है जाड़ा भागा, तितली गाती मेरे मन को
Read More1. मकर संक्रांति सर्दी अब काफी कम है हुई धूप भी चम-चम है चलो दही-चूड़ा खायें सब्जी, तिलकुट भी लायें
Read More१. ढोलक शादी में बजता ढोलक ढम-ढम ढम-ढम, ढक-ढक, ढक हम बच्चे इसपर नाचें ता-ता थैया, टक-टक, टक २. शादी
Read Moreनेता मामा दूर के, पुए पकाएं गुड़ के आप खाएं थाली में, जनता को दें प्याली में प्याली गई परदेश
Read More1. साबुन खाना खाने से पहले शौचक्रिया के बाद हाथ धोइए साबुन से रखें बात ये याद 2. सरसो तेल
Read Moreकुट-कुट-कुट, खाऊंगी मैं दो बिस्कुट। एक-एक सबको मैं दूंगी, मुझको प्यारे दो बिस्कुट॥
Read More