बाल कविता – घड़ा मिट्टी का
घड़ा बना हूँ मैं मिट्टी का, आता सबके काम। जैसे गर्मी बढ़ती जाती, सभी
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Read Moreघण घण घण बजी रे घंटी, आया कुल्फी वाला, आया कुल्फी वाला रे, आया कुल्फी वाला।। दादी दे दो ना
Read Moreजाम-कच्छार से होकर गब्दीनाला बहता था। नाले के किनारे तरह-तरह के बड़े-बड़े वृक्ष थे। हर वृक्ष पर किसी न किसी
Read Moreहंसता चेहरा सबको भाए,रोनी सूरत रास न आए ,हंसने वाला मौज मनाएं ,खुशियां बांटे हाथ मिलाएं,हंसने से न हो बीमार
Read Moreचारों ओर मची है धूम । सोनू-मोनू, चंपक रहे झूम ।। मेला लगा बड़ा सलोना । खूब बिक रही खेल-
Read Moreउच्च शिक्षा का रस्ता है यह। देखो तो लगता सस्ता है यह। बच्चों का किरदार है बस्ता। जीवन का आधार
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