बाल कविता
गुल्लक मेरी है छोटी-सी, रंग बिरंगी सुंदर प्यारी-सी।। खनखन उसकी प्यारी है, खुशियां छितराती न्यारी है।। मम्मी पापा जब पैसे
Read Moreअद्भुत अनुपम भारत मेरा।प्रचुर सम्पदा का शुभ घेरा।। कलरव करतीं यमुना गंगा।फहराता है सदा तिरंगा।।देव – देवियाँ करतीं फेरा।अद्भुत अनुपम
Read Moreकल की बात करो मत बच्चोंआज अभी सब काम करो, काम बड़ा है सारे जग सेइसका तुम सम्मान करो कल
Read Moreनन्हे-नन्हे कदम बढ़ें, सपनों की ओर,हर दिन नया सूरज, हर रात नये चोर।बारिश की बूँदों में कागज़ की कश्ती,तारों से
Read Moreबचपन का वह दौर सजीला,कभी रूठना कभी #मचलना,खेल-खेल में गिर भी जाते,गिर-गिरकर फिर स्वयं सँभलना । हँसते-हँसते रोने लगना,लोरी सुनकर
Read Moreभोलापन चंदू का देखो,चटनी चाटी चाचा ने,जाने क्या दद्दू से बोला,मार खाई मामा ने!मामा तो चंदमामा थे,झट तारों की सभा
Read Moreमुझको कहते बाल सलोना, मैं अपनी मम्मी का खिलौना,मुझको भातीं चीजें कितनी, सबसे प्यारा मेरा खिलौना।सबसे पहले मुझको भाया, झन-झन
Read Moreरंगबिरंगी तितली हूँ मैं, फूलों का रस लेती हूँ,कहते सभी सयानी हूँ, बच्चों को खुशियां देती हूँ।चंचल-नटखट-कोमल हूँ, पंख हैं
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