बाल कविता

तितली रानी

रंगबिरंगी तितली हूँ मैं, फूलों का रस लेती हूँ,
कहते सभी सयानी हूँ, बच्चों को खुशियां देती हूँ।
चंचल-नटखट-कोमल हूँ, पंख हैं मेरे रंगरंगीले,
फूलों से रंग लेती हूँ, लाल-गुलाबी-नीले-पीले।
बच्चों के मन को बहलाती, तितली रानी हूँ कहलाती,
मुझे पकड़ने को वे लपकते, फुर्र से हूँ मैं उड़ जाती।
पल भर मैं फूलों पर टिकती, पल भर में उड़ जाती हूँ,
भौंरों के संग करती ठिठोली, संग में गाना गाती हूँ।
सिर पर मेरे दो एंटीना, इनसे सूंघती-परखती हूँ,
छः पैरों वाली हूँ मैं, इन पर बैठा करती हूँ।
रेशम जैसे कोमल पंख हैं, हाथ लगाते ही उड़ जाती,
बच्चे समझते डरती हूँ मैं, जब मैं पकड़ में नहीं आती!
फुलवारी है मेरा जीवन, फुलवारी में मैं रहती हूँ,
डंक न रखती, डरना न मुझसे, बच्चों से मैं कहती हूँ।

— लीला तिवानी

*लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। लीला तिवानी 57, बैंक अपार्टमेंट्स, प्लॉट नं. 22, सैक्टर- 4 द्वारका, नई दिल्ली पिन कोड- 110078 मोबाइल- +91 98681 25244