चटनी चाटी चाचा ने
भोलापन चंदू का देखो,
चटनी चाटी चाचा ने,
जाने क्या दद्दू से बोला,
मार खाई मामा ने!
मामा तो चंदमामा थे,
झट तारों की सभा बुलाई,
मुझको कितनी मार पड़ी है,
आती है अब तक भी रुलाई!
चंदू तो भोला-भाला है,
उसको कोई समझ नहीं,
दे दो उसको टॉफी-बिस्कुट,
वरना करेगा शरारत नई!
चंदू भोला-भाला हो-न-हो,
तुम सब बहुत शरारती हो,
झटक लोगे टॉफी-बिस्कुट उससे,
मिले हुए सब बराती हो!
— लीला तिवानी
