क्या शाकाहारियों को स्वच्छ हवा में सांस लेने का अधिकार नहीं?
लोकतांत्रिक समाज में प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद का भोजन करने की स्वतंत्रता प्राप्त है। यह स्वतंत्रता व्यक्तिगत गरिमा और
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Read Moreजंगलों से उठती आह अब गांवों की दहलीज तक सुनाई देने लगी है। आधी रात खेतों में उतरते हाथी, बस्तियों
Read Moreप्रकृति जब अपना रौद्र रूप दिखाती है, तब वह मनुष्य की तकनीकी उपलब्धियों, आर्थिक प्रगति और प्रशासनिक दावों की वास्तविक
Read Moreभारत में मानसून केवल एक ऋतु नहीं है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, कृषि, जल-संसाधनों और जनजीवन की धुरी है। सदियों
Read Moreउत्तर प्रदेश में गर्मी से परेशान लोगों के लिये जल्द अच्छी खबर आने वाली है। यूपी में मानसून 27 से
Read Moreसभ्यताओं का भविष्य केवल संसदों में नहीं, खेतों की मिट्टी, जंगलों की हरियाली और जलस्रोतों की जीवनधारा में भी लिखा
Read Moreपर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत ने भूमि बहाली के क्षेत्र में एक ऐसी अभूतपूर्व
Read Moreस्कंदपुराण में एक सुंदर श्लोक हैअश्वत्थमेकम् पिचुमन्दमेकम् न्यग्रोधमेकम् दश चिञ्चिणीकान्।।कपित्थबिल्वाऽऽमलकत्रयञ्च पञ्चाऽऽम्रमुप्त्वा नरकन्न पश्येत्।। अश्वत्थः = पीपल (100% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता
Read Moreभारत सदियों से गर्म जलवायु वाला देश रहा है। यहां के लोगों ने अपने जीवन, वास्तुकला, कृषि और सामाजिक परंपराओं
Read Moreवसुंधरा को हरा-भरा बनाने के प्रारंभिक तरीके जहाँ थकाऊ और खर्चीले साबित हो रहे हैं, वहीं बांसवाड़ा के अद्वितीय भूगोल
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