मोर, पपीहा और कोयल: सावन के प्राकृतिक संगीत की तीन सुरें
सावन के आगमन के साथ प्रकृति का रूप ही बदल जाता है। आकाश में काले बादल छा जाते हैं, वर्षा
Read Moreसावन के आगमन के साथ प्रकृति का रूप ही बदल जाता है। आकाश में काले बादल छा जाते हैं, वर्षा
Read Moreवर्षा की फुहारों से नहायी धरती, हरियाली की चादर ओढ़े पहाड़ियाँ, कल-कल बहते नदी-नाले, पेड़-पौधों पर पसरी नवजीवन की आभा
Read Moreकूड़े का कोई टुकड़ा सिर्फ कूड़ा नहीं, खासकर जब वह अस्पताल से निकला हो। उसे जमीन में दबाने से खतरा
Read Moreमानव सभ्यता की प्रथम चेतना से आधुनिक युग तक, कुछ समुदायों ने प्रकृति पर अधिकार नहीं, बल्कि उसके साथ आत्मीय
Read Moreअगस्त का महीना आते ही लगता है, मानो आकाश ने अपने नील आँचल पर मेघों की श्यामल कढ़ाई कर ली
Read Moreवैश्विक स्तरपर आज हर देश पर्यावरण समस्याओं का सामना कर रहा है जिसका समाधान खोजने उसपर अमल करने के लिए
Read Moreधरती पर जीवन की कल्पना पेड़ों के बिना नहीं की जा सकती। यदि प्रकृति ने मनुष्य को सबसे अनमोल उपहार
Read Moreसावन सिर्फ बारिश का मौसम नहीं है, बल्कि जीवन के सभी रूपों का उत्सव है। भारत मानसून के आगमन के
Read Moreप्रकृति के इन मूक रक्षकों, आदि-काल से अडिग खड़े विराट महाशिखरों और अपनी अनंत हरी छांव में सदियों से एक
Read Moreभारत का जल संकट नदियों में घटते प्रवाह से अधिक, हमारी नीतियों में घटती दूरदृष्टि का संकट है। विडंबना यह
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