मूल्यों की शिक्षा (व्यंग्य)
मैं शिक्षक हूँ। एक ऐसे विषय का जिसे न बच्चों पढ़ने में विशेष रुचि है न माँ-बाप की पढ़वाने में।
Read Moreमैं शिक्षक हूँ। एक ऐसे विषय का जिसे न बच्चों पढ़ने में विशेष रुचि है न माँ-बाप की पढ़वाने में।
Read Moreअक्सर जब मैं अपनी कोई बात, अपनी पत्नी से मनवाना चाहता हूं, तो गुस्से में आकर कह देता हूं, मेरी
Read Moreआज नहाते नहाते एक ख्याल आया. आपने नोट किया होगा अक्सर यह ख्याल नहाते और पेट साफ करते वक़्त ही
Read Moreयह ‘कीचड़-उछाल संस्कृति’ का युग है। यत्र-तत्र-सर्वत्र कीचड़- उछाल उत्सव का वातावरण है। कोई भी कीचड़ उछालने में पीछे नहीं
Read Moreचुनाव से पहले और चुनाव के बाद हजारों उठा पटक,लटके झटके और भांति-भांति के बोल बच्चन सुनने के बाद भी
Read Moreउँगली करना अच्छी बात नहीं है। परिवार से लेकर विद्यालय तक और सेवा से लेकर सामाजिक जीवन तक यही सिखाया
Read Moreमुसलमानों के लिए बहुत आदरणीय व्यक्ति मुल्ला नसरुद्दीन बड़े पहुंचे हुए दार्शनिक माने जाते थे, दुनियाभर में उनके लाखों कद्रदान
Read Moreजूते पैरों की आन बान शान होते हैं ।जूते पहले हमारे देश में आम आदमी को बनाने का अधिकार था
Read Moreआग की सामान्य प्रकृति है : जलाना।उसके समक्ष जो भी वस्तु आती है या लाई जाती है ;वह उसे जलाकर
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